E-Pharmacy effect on Pharmacist in Hindi

फार्मासिस्ट पर ई-फार्मेसी का प्रभाव, E-Pharmacy effect on Pharmacist

ई-फार्मेसी का फार्मासिस्ट के कैरियर पर प्रभाव

पिछले वर्ष सितम्बर में आल इंडिया आर्गेनाईजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) ने दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल कर अपना विरोध जताया था. इस हड़ताल में देशभर के लगभग साढ़े आठ लाख दवा विक्रेताओं ने भाग लेकर अपना विरोध जताया था.

वर्तमान में देश में दवाइयों की कुल बिक्री में ऑनलाइन प्लेटफार्म का मात्र दो से तीन प्रतिशत ही योगदान है. परन्तु जिस प्रकार जनरल आइटम्स की ऑनलाइन सेल ने बाजार में तहलका मचा दिया है उसे देखकर लगता है कि भविष्य में दवाइयों की बिक्री भी ऑनलाइन माध्यम से बढ़ेगी.

आज जिस प्रकार देश में रिटेल व्यापारी, अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नेपडील, मिन्त्रा, बिग बास्केट, ग्रोफर, पेटीएम आदि को अपने व्यापार में गिरावट के लिए दोषी ठहरा रहे हैं. उसे देखकर यह कहना मुश्किल नहीं है कि भविष्य में दवा व्यापार में भी यही सब कुछ होने वाला है.

अभी दवा व्यापार में मुख्यतया नेटमेड्स, फार्मइजी, मेड लाइफ, 1एमजी जैसी कुछ बड़ी कंपनियों सहित बहुत सी छोटी कंपनियाँ ऑनलाइन दवा वितरण के कार्य में लगी हुई है. जब भविष्य में अमेजन, फ्लिपकार्ट आदि बड़ी कंपनियाँ ऑनलाइन दवा के क्षेत्र में पूरी तरह से आएँगी, तब क्या होगा?

अमेजन ने तो अमेरिका में पिलपैक ऑनलाइन फार्मेसी को एक्वायर करके ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में उतरने का एक संकेत दे दिया है. भारत में शायद यह ऑनलाइन ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन के बनकर लागू होने का इन्तजार कर रही है.

ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियाँ वर्तमान में ग्राहकों को दस से बीस प्रतिशत तक का डिस्काउंट दे रही हैं. इतना डिस्काउंट एक ऑफलाइन दवा विक्रेता के लिए कतई संभव नहीं है.

इस कारण से ये दवा विक्रेता जब वर्तमान में कार्यरत ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों से ही मुकाबला नहीं कर पा रहे है तो फिर इन बड़ी कंपनियों के इस क्षेत्र में उतरने के बाद क्या स्थिति होगी इसका बड़ी आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है.

डिजिटल हेल्थ प्लेटफार्म (DHP) के प्रेसिडेंट तथा 1एमजी के सीईओ प्रशांत टंडन के अनुसार ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियाँ दवाओं पर इतना डिस्काउंट बिजनेस के हर स्टेप जैसे रियल एस्टेट, इन्वेंटरी, सैलरी, यूटिलिटी आदि पर कास्ट कटिंग करके दे पा रही हैं. ऑनलाइन कंपनियों का मुख्य खर्चा दवाइयों की डिलीवरी पर हो रहा है.

अगर ऑफलाइन फार्मेसी की बात की जाए तो भारत में अपोलो फार्मेसी ही सबसे बड़ी है जिसके पास अपने लगभग 3500 स्टोर्स हैं. बदलते समय के साथ इसने भी अपने ई-फार्मेसी पोर्टल को भी शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए है.

विदेशी ब्रोकरेज हाउस सीएलएसए (CLSA) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में इंडियन फार्मा मार्केट की वैल्यू लगभग बीस बिलियन डॉलर की है तथा यह प्रतिवर्ष दस से बारह प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. वर्ष 2025 तक इसके लगभग 35 बिलियन डॉलर हो जाने की सम्भावना है.

भारत में ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन मार्केट आज भी बहुत ज्यादा अन-ऑर्गेनाइज्ड तरीके से कार्य कर रहा है. इस ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन मार्केट में अस्सी हजार से ऊपर डिस्ट्रीब्यूटर्स तथा साढ़े आठ लाख से अधिक रिटेल फार्मेसी कार्यरत है.

ऑनलाइन फार्मेसी की तो अभी शुरुआत ही है जिसकी मार्केट वैल्यू भारतीय बाजार में अभी लगभग आधा बिलियन डॉलर है. ई-फार्मेसी के इस नवजात मार्केट की ग्रोथ वर्ष 2022 तक सात गुना बढ़कर 3.7 बिलियन डॉलर होने की सम्भावना है.

वर्तमान में ई-फार्मेसी पर मुख्यतया कार्डियोवैस्कुलर डिजीज, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, कैंसर, अस्थमा, आर्थराइटिस आदि जैसी क्रोनिक बिमारियों से सम्बंधित दवाइयाँ अधिक बिकती है परन्तु जैसे-जैसे ई-फार्मेसी से सम्बंधित नियम कायदे भारत सरकार द्वारा जारी कर दिए जाएँगे वैसे-वैसे अन्य बिमारियों की दवाइयाँ भी अधिकता से उपलब्ध होना शुरू हो जाएगी.

भारत में ऑनलाइन फार्मेसी का व्यापार शुरू से ही कानूनी दाव पेंचों में उलझा हुआ है. पिछले वर्ष दिल्ली हाई कोर्ट तथा मद्रास हाई कोर्ट ने दवाओं के ऑनलाइन व्यापार पर रोक लगा कर केंद्र सरकार को दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के सम्बन्ध में नियम बनाने के लिए कहा.

सरकार ने बाद में ड्राफ्ट रूल्स बनाकर इस सितम्बर ने उन्हें सार्वजनिक कर पब्लिक से आपत्तियाँ एवं सुझाव मांगे. इन ड्राफ्ट रूल्स के अनुसार दवाओं की बिक्री केवल सरकार से रजिस्टर्ड ई-पोर्टल्स ही कर पाएँगे तथा इन्हें पेशेंट्स तथा डॉक्टर्स को वेरीफाई करने के साथ-साथ प्रिस्क्रिप्शन को भी सुरक्षित रखना होगा.

कोई भी व्यक्ति जो ई-फार्मेसी स्टार्ट करना चाहता है उसे सरकारी ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म 18AA भरकर केन्द्रीय लाइसेंसिंग अथॉरिटी से परमिशन लेनी होगी.

अब खबर आई है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने ई-फार्मेसी रेगुलेशन में बदलाव कर दिया है. इसके अनुसार अब दवा की ऑनलाइन बिक्री करने वाले ई-फार्मेसी प्लेटफार्म अपने पास दवाओं को स्टोर नहीं कर पाएँगे.

इन्हें दवा को ग्राहकों तक दवा पहुँचाने के लिए रिटेल तथा होलसेल ड्रग डिस्ट्रीब्यूटर्स से संपर्क करना होगा.

ऑनलाइन ई-फार्मेसी प्लेटफार्म पर सिर्फ दवा की बिक्री के लिए आर्डर बुक किए जा सकेंगे लेकिन दवा की डिलीवरी के लिए रिटेल तथा होलसेल डिस्ट्रीब्यूटर का सहारा लेना होगा. साथ ही सभी ई-फार्मेसी प्लेटफार्म को अपने पास दवा का प्रिस्क्रिप्शन भी रखना होगा.

इसके साथ दवा के ऑफलाइन रिटेलर को भी ग्राहक के घर पर दवा पहुँचाने का अधिकार दिया जा रहा है. पहले ग्राहक के घर पर दवा पहुँचाने का कार्य गैरकानूनी था.

इन सब नियम कायदों का फार्मासिस्ट पर क्या असर होने वाला है. क्या इनसे फार्मासिस्ट के लिए ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर कम हो जाएँगे या फिर बढ़ेंगे?

मेरे विचार में ऑनलाइन ई-फार्मेसी प्लेटफार्म के माध्यम से दवा वितरण होने से फार्मासिस्ट के लिए स्कोप बढेगा. क्योंकि जब ई-फार्मेसी के क्षेत्र में बड़ी कंपनियाँ जब उतरेंगी तब रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की मांग बढ़ेगी.

अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनियों के दवा वितरण के क्षेत्र में आने से फार्मासिस्ट की नियुक्ति कॉर्पोरेट के तरीके से होगी. फार्मासिस्ट को सम्मानजनक वेतन मिलेगा.

बाकी वर्तमान में तो फार्मासिस्ट के हालात सभी जानते ही हैं? अभी फार्मासिस्ट को नौकरी नहीं मिलती है बल्कि उसके लाइसेंस को नौकरी मिलती है. सालाना बीस पच्चीस हजार रूपए में फार्मासिस्ट का डिप्लोमा या डिग्री किसी दवा व्यापारी के यहाँ दिवार पर टंग जाती है.

जिस प्रकार अपोलो फार्मेसी, फार्मासिस्ट को अपने यहाँ वेतन पर रखती है उस प्रकार कोई अन्य रिटेल विक्रेता फार्मासिस्ट को वेतन पर नहीं रखता है. ई-फार्मेसी का मुख्य विरोध भी वे दवा विक्रेता अधिक कर रहे हैं जिन्होंने फार्मासिस्ट को नहीं उनकी शिक्षा को किराए पर रख रखा है.

सुनते हैं कि महाराष्ट्र और गुजरात में फार्मासिस्ट को वेतन पर रखा जाता है उसकी डिग्री या डिप्लोमा को नहीं. जिस दिन सम्पूर्ण देश में फार्मासिस्ट को नौकरी मिलने लग जाएगी, फिर चाहे वो कॉर्पोरेट सेक्टर में मिले या छोटे रिटेल कारोबारी के यहाँ, उस दिन से फार्मासिस्ट की वास्तविक पहचान बनेगी.

लेखक, Writer

रमेश शर्मा {एम फार्म, एमएससी (कंप्यूटर साइंस), पीजीडीसीए, एमए (इतिहास), सीएचएमएस}


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Ramesh Sharma

I am a Pharmacy Professional having M Pharm (Pharmaceutics). I also have MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA and CHMS. Usually, I travel to explore the hidden tourist places and share this information on GoJTR.com. You can find here many undiscovered travel destinations of Rajasthan and get help to enjoy these beautiful places.

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