सभी के लिए प्रिस्क्रिप्शन का परिचय जरूरी

सभी के लिए प्रिस्क्रिप्शन का परिचय जरूरी - हम सभी बीमार होते रहते हैं अतः रोजमर्रा की जिन्दगी में हमारा वास्ता अमूमन प्रिस्क्रिप्शन से पड़ता रहता है।

प्रिस्क्रिप्शन का सामान्य मतलब चिकित्सक द्वारा मरीज को लिखी गई वह पर्ची जिस पर रोग और उसको ठीक करने के लिए दी जाने वाली दवाइयों की जानकारी होती है।

सामान्यतः इसे ‘डॉक्टर की पर्ची’ या फिर ‘दवाई की पर्ची’ कहा जाता है परन्तु इसका अंग्रेजी में वैज्ञानिक नाम प्रिस्क्रिप्शन होता है।

प्रिस्क्रिप्शन का डॉक्टर, फार्मासिस्ट तथा मरीज तीनों के लिए बहुत महत्त्व होता है। हर इंसान के लिए प्रिस्क्रिप्शन और उससे सम्बंधित सभी बातों का जानना बहुत जरूरी होता है।

प्रिस्क्रिप्शन एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टिसनर या फिर किसी अन्य वैधानिक लाइसेंस प्राप्त प्रेक्टिसनर जैसे की डेंटिस्ट, वेटेरिनारियन, आदि द्वारा फार्मासिस्ट को दिया गया वह लिखित आदेश है जिसकी मदद से फार्मासिस्ट मरीज के लिए दवा को कंपाउंड और डिस्पेंस करता है।

फार्मासिस्ट इस प्रिस्क्रिप्शन की मदद से मरीज को उचित दवा का वितरण करता है। प्रिस्क्रिप्शन में फार्मासिस्ट और मरीज दोनों के लिए ही निर्देश होते हैं जिसमे फार्मासिस्ट के लिए दवा देने सम्बन्धी तथा मरीज के लिए दवा लेने सम्बन्धी निर्देश होते हैं।

इस प्रकार प्रिस्क्रिप्शन एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा डॉक्टर और फार्मासिस्ट के संयुक्त कौशल से मरीज का ईलाज किया जाता है। सामान्यतः सभी प्रिस्क्रिप्शन अंग्रेजी भाषा में ही लिखे जाते हैं परन्तु इसमें लैटिन भाषा के शब्दों और संक्षिप्त नामों का बहुतायत से प्रयोग किया जाता है।

सभी के लिए प्रिस्क्रिप्शन का परिचय जरूरी

अतः हम सभी के लिए प्रिस्क्रिप्शन और उसमे प्रयुक्त शब्दों और संक्षिप्त नामों का ज्ञान बहुत आवश्यक है।

सबसे पहले हमें प्रिस्क्रिप्शन के विभिन्न भागों की जानकारी होना आवश्यक है। एक प्रिस्क्रिप्शन विभिन्न भागों में विभाजित होता है जो निम्न प्रकार हैं:

1. दिनांक
2. मरीज का नाम, आयु, लिंग और पता
3. सुपर्स्क्रिप्शन
4. इन्स्क्रिप्शन
5. सब्सक्रिप्शन
6. सिग्नेचरा
7. रिन्यूअल इंस्ट्रक्शन्स
8. डॉक्टर के हस्ताक्षर, पता और रजिस्ट्रेशन नंबर

अब हम उपरोक्त सभी का लघु अध्ययन करते है।

दिनांक उस दिन को इंगित करती है जिस दिन डॉक्टर ने मरीज को प्रिस्क्रिप्शन लिखा है अर्थात यह उपचार की शुरुआत का दिन होता है। मरीज को उसी दिन से दवा लेना शुरू कर देना चाहिए।

मरीज का नाम, आयु, लिंग और पते से मरीज के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है। आयु और लिंग मरीज को दी जाने वाली दवाओं की मात्र का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सामान्यतः बच्चों और महिलाओं को वयस्क पुरुषों के मुकाबले में कम मात्रा में दवा की आवश्यकता होती है अतः इन्हें दी जाने वाली दवा की मात्रा कम होती है।

सुपर्स्क्रिप्शन को एक चिन्ह ‘Rx’ से प्रदर्शित किया जाता है एवं इसको प्रिस्क्रिप्शन लिखने से पहले लिखा जाता है। यह एक लैटिन शब्द ‘रेसिपी’ का संक्षिप्त रूप है जिसका अंग्रेजी में मतलब ‘यू टेक’ होता है।

इस शब्द की उत्पत्ति जुपिटर के चिन्ह से हुई जिसे ‘गॉड ऑफ़ हीलिंग’ कहा जाता था। इस चिन्ह का प्रयोग भगवान से मरीज के स्वस्थ होने की प्रार्थना के लिए किया जाता था।

इन्स्क्रिप्शन प्रिस्क्रिप्शन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जिसमे दवाइयों के नाम तथा उनकी निर्धारित मात्रा से सम्बंधित दिशा निर्देश होते हैं। दवाइयों के नाम सामान्यतः अंग्रेजी में होते है परन्तु उनकों लेने के लिए संक्षिप्त संकेत लैटिन भाषा में होते हैं। अतः हमें इन मुख्य-मुख्य लैटिन संकेतों का ज्ञान होना आवश्यक है।

सब्सक्रिप्शन फार्मासिस्ट को दिए गए दिशा निर्देश होते हैं जिनकी मदद से वह मरीज को दवा की खुराक डिस्पेंस करता है।

आधुनिक प्रिस्क्रिप्शन में यह भाग नहीं होता है क्योंकि अब सभी दवाइयाँ रेडीमेड बनी हुई मिलती है तथा अब फार्मासिस्ट द्वारा प्रिस्क्रिप्शन को कंपाउंड और डिस्पेंस नहीं किया जाता है।

सिग्नेचरा मरीज को डॉक्टर द्वारा दवा लेने सम्बन्धी निर्देश होते हैं तथा अमूमन इसे ‘Sig’ से प्रदर्शित किया जाता है तथा फार्मासिस्ट द्वारा इन निर्देशों को दवा के लेबल पर दर्शाया जाता है।

आजकल दवाइयाँ रेडीमेड आने से डॉक्टर इन्स्क्रिप्शन वाले हिस्से में ही यह दिशा निर्देश लिख देते हैं।

रिन्यूअल इंस्ट्रक्शन्स में डॉक्टर यह लिखता है कि मरीज को पुनः वापस दिखाना है या नहीं और अगर दिखाना है तो कितने दिनों के पश्चात दिखाना है।

डॉक्टर के हस्ताक्षर, पता और रजिस्ट्रेशन नंबर से हमें डॉक्टर के सम्बन्ध में पूरी जानकारी मिल जाती है।

सरकारी निर्देशों के अनुसार डॉक्टर्स को प्रिस्क्रिप्शन कैपिटल लेटर्स में लिखना चाहिए तथा दवा के ब्रांड नाम न लिखकर उनके जेनेरिक नाम यानि कि सक्रीय घटकों के नाम लिखने चाहिए जैसे क्रोसिन न लिखकर पेरासिटामोल लिखना चाहिए।

अब हमें मुख्य-मुख्य लैटिन शब्दों और संक्षिप्त संकेतों का ज्ञान होना भी आवश्यक है जो कि इस प्रकार है:

1. सेम इन डाई – दिन में एक बार
2. बी.आई.डी. – दिन में दो बार
3. टी.आई.डी. और टी.डी. – दिन में तीन बार
4. क्यू.आई.डी. और क्यू.डी. – दिन में चार बार
5. ओ.एम. – प्रत्येक सुबह
6. ओ.एन. – प्रत्येक रात
7. एम – सुबह
8. एन – रात
9. क्यू – प्रत्येक
10. ओ.एच. – प्रत्येक घंटे
11. ओ.क्यू.एच. – प्रत्येक चार घंटे
12. ए.सी. – भोजन से पहले
13. पी.सी. – भोजन के पश्चात
14. एच.एस. – रात को सोते समय
15. एस.ओ.एस. – जब आवश्यकता हो या जब जरुरी हो
16. पीओ – मुँह से
17. एसटीएटी – तुरंत
18. ए.डी. – दाँया कान
19. सी – साथ में
20. ओडी – प्रत्येक दिन
21. ओ.डी. – दाँयी आँख
22. एक्यू – पानी
23. सिबोस – भोजन
24. एच – घंटा
25. ओएमएन – प्रत्येक
26. क्यू.एस. – जितना पर्याप्त हो (पर्याप्त मात्रा में)
27. आर.एक्स. – आप लीजिए
28. एसएस – आधा
29. सीएपीएस – कैप्सूल
30. आईएनजे – इंजेक्शन
31. टीएबी – टेबलेट
32. पी.आर.एन. – जब आवश्यकता हो
33. आईएम – इंट्रामस्कुलर
34. आईवी – इंट्रावेनस
35. एससी – सबक्यूटेनियस

सभी के लिए प्रिस्क्रिप्शन का परिचय जरूरी Introduction of prescription for everyone is necessary

Written by:
Ramesh Sharma

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