क्रोध को शांत करने का आसान तरीका

क्रोध को शांत करने का आसान तरीका - मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वह विभिन्न परिस्थितियों में रहकर अपना जीवन यापन करता है। उसके जीवन को कभी खुशी और कभी गम घेरे रहते हैं।


कई मर्तबा परिस्थितियाँ उसके अनुकूल नहीं होती है और मनुष्य एक ऐसा रूप धारण कर लेता है जो किसी को प्रिय नहीं होता, वह रूप क्रोध का होता है।


जब क्रोध उत्पन्न होता है तभी से मनुष्य मूर्खता करना प्रारम्भ कर देता है। इस मूर्खता में उसे अपने पराये तक का भान नहीं रहता है।


क्रोध में व्यक्ति को सत्य और असत्य का कोई ज्ञान नहीं रहता है एवं उसे स्वयं की कही बातें सत्य प्रतीत होती है। क्रोधी व्यक्ति यह नहीं जानता कि वह अपना स्वयं का खून जला रहा है।


क्रोध एक भयंकर अग्नि के माफिक होता है जो मनुष्य को अन्दर ही अन्दर जला डालता है। जब क्रोध आता है तो दिमाग के सारे विचार क्षेत्र अपना कार्य करना बंद कर देते हैं और मनुष्य दूसरों के बनिस्पत खुद का सर्वाधिक अहित कर बैठता है।


जब क्रोध दिमाग पर हावी हो जाता है तो बुद्धि अपना स्थान छोड़ देती है और सारा विवेक समाप्त प्राय: हो जाता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति के प्रति मन में क्रोध रखनें की अपेक्षा उस व्यक्ति से स्पष्ट रूप से बात कर लेनी चाहिए जिससे न तो अंतर्मन दुखी होगा और न ही दूरियां बढेंगी। क्रोध एक ऐसा विषाणु है जो परिवार के परिवार समाप्त कर देता है।


क्रोधी व्यक्ति के सारे रिश्ते नाते समाप्त हो जाते हैं। कोई व्यक्ति उसके पास नहीं बैठता है और बात करनें से भी कतराता है जिस वजह से वह अकेलापन महसूस करने लगता है। सब उससे भयभीत रहते हैं कि पता नहीं वह कब क्रोधित हो जाए।


क्रोध में कई बार व्यक्ति की शालीनता, मानवता, अपनापन आदि का विलोप हो जाता है और क्रोध की ज्वाला में वह दूसरों के अरमानों, सपनों का खून कर बैठता है।


क्रोध की वजह से कई प्रकार की मानसिक और शारीरिक व्याधियां घेर लेती है जैसे कि अवसाद, तनाव, मानसिक असंतुलन, पागलपन, उच्च रक्तचाप, ह्रदयाघात. मधुमेह, अनिद्रा आदि।


क्रोध क्यों पैदा होता है? क्रोधी व्यक्ति की बुद्धि कार्य करना बंद क्यों कर देती है? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर हमें खोजना होगा लेकिन यह भी स्पष्ट है कि जो व्यक्ति अपनी पीड़ा को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं कर पाता वह व्यक्ति ही सबसे ज्यादा क्रोधी होता है।


क्रोध एक राक्षसी गुण होने के साथ साथ एक प्रमुख घरेलू समस्या है जिसका निराकरण अति आवश्यक है।


सर्वप्रथम, क्रोध आने पर हमें क्रोध वाले स्थान से चला जाना चाहिए या फिर हमें जिस बात पर क्रोध आ रहा है उससे ध्यान भटकाना चाहिए क्योंकि क्रोध एक क्षणिक आवेग होता है, जितनी जल्दी यह उत्पन्न होता है उतनी शीघ्रता से यह समाप्त भी होता है।


दूसरा, हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच बैठना चाहिए अर्थात हमें अकेला कम से कम रहना चाहिए क्योंकि अकेलापन कुतर्क और कूविचारों को जन्म देता है।


तीसरा, हमें समस्यायों को मिल बैठकर हल करने का प्रयास करना चाहिए और अगर ऐसा नहीं हो तो किसी की मध्यस्थता से इसे सुलझाना चाहिए।


चौथा, हमें अपना ध्यान थोड़ा बहुत धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यो में भी लगाना चाहिए जिससे मन शांत रहता है क्योंकि माहौल का बहुत प्रभाव पड़ता है।


पाँचवा, हमें दृढ़ संकल्प के साथ क्रोध को नियंत्रित करने का प्रण लेना चाहिए क्योंकि क्रोध पर अंतिम नियंत्रण हमारा दिमाग और हमारा मन ही कर सकता है।


क्रोध के परिणामों पर चिंतन करते हुए इस पर नियंत्रण करना अति आवश्यक है क्योंकि क्रोध नहीं रहने से हम शारीरिक और मानसिक रूप से तो स्वस्थ रहेंगे ही साथ ही साथ सामाजिक रूप से प्यार और दुलार भी पाएंगे।


क्रोध को शांत करने का आसान तरीका Easy way to calm anger

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