सही करियर का चुनाव कैसे करे

सही करियर का चुनाव कैसे करे? - करियर का चुनाव करते समय विधार्थी अपने आपको दोराहों पर खड़ा पाता हैं क्योकिं आज के समय में विद्यार्थियों के पास अपना करियर चुनने के बहुत अधिक विकल्प उपस्थित होते हैं।


एक तो विकल्पों की अधिकता तथा दूसरा पेरेंट्स का ज्ञात और अज्ञात दबाब काफी हद तक इस भ्रम की स्थिति को पैदा करता हैं।


बचपन से ही पेरेंट्स बच्चों की इच्छा को जाने बिना उनके भविष्य का फैसला कर लेते हैं कि हमारा बेटा डॉक्टर बनेगा या फिर इंजिनियर बनेगा।


पडौस के शर्माजी का बेटा डॉक्टर हैं तो हमारा बेटा भी डॉक्टर बनना चाहिए और अगर पडौस के वर्माजी का बेटा बैंक मेनेजर हैं तो हमारा बेटा भी बैंक मेनेजर बनेगा।


पेरेंट्स को समझना चाहिए कि दूसरों को देखकर प्रेरणा लेना बहुत अच्छी बात हैं लेकिन उन प्रेरित इच्छाओं को अपने बच्चों पर लाद देना बहुत अनुचित होता हैं।


जो उपलब्धियां पेरेंट्स स्वयं प्राप्त नहीं कर पाते हैं वो अपनी इन अधूरी उपलब्धियों तथा इच्छाओं को अपने बच्चों के माध्यम से पूर्ण करने का प्रयास करते हैं।


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हर बच्चे की अपनी अलग क्षमता होती हैं जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता हैं। बच्चे के करियर का चुनाव करते वक्त इस बात का प्रमुखता से ध्यान रखना परमावश्यक हैं अन्यथा बच्चे के साथ जाने अनजानें में बहुत बड़ा अन्याय हो सकता हैं।


पेरेंट्स को बच्चों के करियर को चुनते समय अपनी इच्छाओं के बजाय उनकी इच्छाओं और रुचियों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो उनको परम प्रिय हैं। क्यों न बच्चों की इन परम प्रिय रुचियों तथा इच्छाओं को ही उनका करियर बना दिया जाये।


अगर ऐसा होता हैं तो बच्चे अपनी रुचियों को पूर्ण करने का परमानन्द तो लेंगे ही, साथ ही साथ अपने करियर में भी चार चाँद लगा सकेंगे। जब रूचि ही कर्म बन जाती हैं तब इंसान को प्रगति के पथ पर अग्रसर होने से कोई भी नहीं रोक सकता हैं।


विद्यार्थी की असफलता का सबसे बड़ा कारण यही होता हैं कि उसके करियर का चुनाव कोई और करता है और उसे नासमझ समझ कर उसकी इच्छा को दबा दिया जाता हैं। उसके लिए उस करियर का चुनाव कर दिया जाता हैं जो उसे पसंद नहीं होता।


बिना रूचि के विषयों को पढनें का मन भी नहीं करता हैं और परिणामस्वरूप उचित सफलता प्राप्त नहीं होती। करियर का चुनाव करते वक्त विधार्थी के विचारों तथा इच्छाओं को समझकर उनका सम्मान करना चाहिए।


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बच्चों के सफल तथा असफल होने में पेरेंट्स का ही सबसे प्रमुख योगदान होता हैं। जो पेरेंट्स अपने बच्चों के विचारों के साथ समन्वय बनाकर समझदारी भरा निर्णय लेते हैं उनके बच्चों के असफल होनें की संभावना बहुत कम होती हैं और जहाँ पर बच्चों के विचारों को अनसुना करके निर्णय लिए जाते हैं वहां असफल होने की संभावना प्रबल होती हैं।


इसलिए अगर बच्चों को वांछित सफलता का स्वाद चखाना हैं तो हमें उनसे मित्रवत व्यवहार करके उनके विचारों, इच्छाओं तथा रुचियों का पता करना होगा और बचपन से ही उस दिशा में आगे बढ़ना होगा।


बच्चे सिर्फ अपने विचार तथा भावनाओं को पेरेंट्स के सामने रख सकते है अब ये पेरेंट्स पर निर्भर करता हैं कि वो उनको कितनी तवज्जों देते हैं।


सही करियर का चुनाव करने की जिम्मेदारी बच्चों की ही नहीं, काफी हद तक पेरेंट्स की भी होती हैं क्योंकिं अक्सर सही करियर का चुनाव तो बचपन में ही हो जाता हैं।


सही करियर का चुनाव कैसे करे? How to choose right career?


Written by:

Ramesh Sharma


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