परीक्षा में सफलता कैसे प्राप्त करे?

परीक्षा में सफलता कैसे प्राप्त करे? - परीक्षा का नाम सुनते ही विद्यार्थियों में खलबली मचना शुरू हो जाती है तथा उनमे एक अजीब तरह का भय छाने लगता है जैसे परीक्षा कोई भूत प्रेत का नाम हो।


परीक्षा की तिथि की घोषणा होते ही परीक्षार्थियों की जीवन शैली में यकायक परिवर्तन आना शुरू हो जाता है।


विद्यार्थी पढ़ाई करने की नई नई योजनाएँ तथा समय सारणियाँ बनाने में जुट जाते हैं। जो विद्यार्थी नास्तिक होते हैं और यदा कदा ही मंदिर जाते हैं उनमे अचानक आस्था जाग जाती है तथा वो रोज मंदिर जाकर अच्छे अंको से पास होने की मन्नते मांगने लगते हैं। कुछ तो रोज उपवास भी रखना शुरू कर देते हैं।


जैसे ही परीक्षा समाप्त होती है उसके बाद वो वापस अपने पुराने ढ़र्रे पर लौट आते हैं। आखिर हम परीक्षा के नाम से इतना भयभीत क्यों रहते हैं? हमें परीक्षाओं के दरमियान किन्ही सहारों की आवश्यकता क्यों महसूस होती है?


हममे बिना भय के परीक्षा का सामना करने का आत्मविश्वास क्यों नहीं होता? हम अपना आत्मविश्वास कैसे बढ़ाएँ ताकि हम ठन्डे तथा संतुलित दिमाग से परीक्षा दे सके?


उपरोक्त सभी प्रश्नों का जवाब एक ही है और वो है योजनाबद्ध तरीके से नियमित रूप से पढ़ाई। अधिकतर विद्यार्थी पढ़ाई करना तब शुरू करते हैं जब परीक्षा की तिथियाँ घोषित हो जाती हैं।


परीक्षा की तिथि घोषित होने के पश्चात इतना वक्त नहीं मिल पाता है कि हम पाठ्यक्रम को अच्छी तरह पढ़ पाएँ।


बहुत से विद्यार्थी परीक्षा की तिथि खिसक कर आगे बढ़ जाने की दुवाएँ मांगने लग जाते हैं और प्रण लेने लगते है कि अगर तिथि आगे बढ़ गई तो वे भविष्य में सुनियोजित ढंग से पढाई करेंगे। अगर किस्मत से ऐसा हो भी जाता है तो फिर वही ढाक के तीन पात हो जाते हैं।


आखिर हम ऐसा क्या करे जिससे हमें परीक्षा का लेश मात्र भी भय ना हो तथा हमें परीक्षाओं के दिन भी रोजमर्रा की तरह महसूस हो।


जैसा पहले बताया है कि अगर योजनाबद्ध तरीके से नियमित पढ़ाई की जाये तो हमारा सफलता प्राप्त करना निश्चित है। पढ़ने के लिए स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन का होना अतिआवश्यक होता है।


प्रतिदिन पढ़ाई करने का कुल समय लगभग पाँच से छ: घंटे तो होना ही चाहिए तथा ये वो समय है जो केवल स्वाध्याय करने के लिए है। जो कुछ भी हम रोज पढ़ते हैं उसकी नियमित रूप से पुनरावृति होना बहुत जरूरी है, अगर हम पुनरावृति नहीं करेंगे तो हमनें जो कुछ भी पढ़ा है वो हम भूल जाएंगे।


पढ़ी हुई चीजों को याद रखने के लिए लगातार अगले तीन दिन तक तथा उसके बाद फिर हर सातवें दिन नियमित रूप से पुनरावलोकन करना बहुत जरूरी होता है।


ईश्वर ने हमारी याद रखनें की क्षमता को बहुत सीमित रखा है तथा हम चीजो और घटनाओं को अधिक समय तक याद नहीं रख सकते हैं। इसीलिए हमें अपनी याददाश्त बढ़ाने के लिए सिर्फ अच्छे विचारों को ही दिमाग में जगह देनी चाहिए।


दिमाग को पठनीय सामग्री के लिए खाली रखना चाहिए क्योंकि दिमाग एक कंप्यूटर की भाँती होता है जिसकी याद रखने की क्षमता सीमित होती है अगर उसमे बेकार की बाते स्थान घेरती रहती है तो फिर काम की बातों के लिए स्थान नहीं बच पाता है।


कंप्यूटर में तो हम याददाश्त बढ़ाने के लिए उसकी हार्डडिस्क की क्षमता को बढ़ा सकते हैं परन्तु दिमाग की हार्डडिस्क को बढ़ाया नहीं जा सकता है।


आखिर में एक जरूरी बात यह है कि पढ़ाई का समय अगर प्रातः चार बजे से दस बजे के बीच का हो तो बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।


सुबह-सुबह हमारा दिमाग तरो ताजा रहता है क्योंकि एक तो हम रात को पूर्ण विश्राम करते हैं जिससे तन और मन में स्फूर्ति रहती है तथा दूसरा सुबह-सुबह ब्रह्म मुहुर्त में शरीर में हार्मोन्स का स्त्राव होता है जो हमारी याददाश्त को बढ़ाने में सहायक होते हैं।


कई लोग रात में पढ़ते हैं लेकिन मेरे विचार में ये उपयुक्त नहीं है क्योंकि रात सिर्फ सोने और विश्राम करने के लिए होती है तथा रात भर जागना निशाचरों का काम होता है विद्यार्थियों का नहीं।


उपरोक्त कुछ तरीको का इस्तेमाल करके हम परीक्षा का डर अपने दिमाग से निकाल सकते हैं तथा परीक्षा में वांछित सफलता प्राप्त कर सकते हैं।


परीक्षा में सफलता कैसे प्राप्त करे? How to get success in examination?

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