फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजिस्ट के लिए बढ़ते अवसर

जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। बढ़ते-बढ़ते भारत का दवा बाजार विश्व के कुल दवा बाजार का साढ़े तीन प्रतिशत के लगभग हिस्सेदार हो गया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार 2022 तक भारत का फार्मास्युटिकल बाजार लगभग साठ अरब डॉलर का हो जाएगा। इस विस्तार की वजह से निश्चित ही फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के क्षेत्र में रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। दवाइयों की बढती मांग की वजह से इनका उत्पादन भी काफी हद तक बढ़ा है जिसकी वजह से इस क्षेत्र में प्रोफेशनल्स की मांग भी काफी बढ़ी है।

फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजिस्ट की भूमिका बढ़ते-बढ़ते काफी महत्वपूर्ण होती जा रही है। इस इंडस्ट्री में प्रोडक्ट यानि मुख्यतया ड्रग के डिजाइन तैयार करने से लेकर इसके निर्माण करने तक की सारी गतिविधि फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजी या फार्मास्युटिकल इंजीनियरिंग कहलाती है। फार्मास्युटिकल ड्रग बनाने वाले पेशेवर को फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजिस्ट या फार्मास्युटिकल इंजीनियर कहते हैं।

दवाइयों की डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, मेन्टेनेन्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इनसे सम्बंधित सम्पूर्ण टेक्नोलॉजी को ऑपरेट करने की जिम्मेदारी फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजिस्ट की होती है। इस कोर्स में प्रवेश के लिए स्किल्ड प्रोफेशनल की आवश्यकता होती है जिसमे डिजाइनिंग, एनालिटिकल, क्रिटिकल थिंकिंग व लीडरशिप से सम्बंधित स्किल का समावेश हो।

फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजिस्ट बनने के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषयों के साथ बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक होता है। इस शाखा में अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट दोनों स्तर पर कोर्स संचालित किए जाते हैं। इस क्षेत्र में करियर की शुरुआत फार्मास्युटिकल इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी या साइंस में बीई, बीटेक, बीएससी कोर्स के माध्यम से उपाधि प्राप्त कर की जा सकती है। कोर्स में प्रवेश एंट्रेंस टेस्ट के द्वारा वैलिड स्कोर प्राप्त करने पर मिलता है। सम्बंधित कोर्स में बैचलर डिग्री कर चुके छात्र पोस्टग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं।

देश के कुछ नामी गिरामी संस्थान जैसे आईआईटी-बीएचयू, इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई, कलकत्ता यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी हैदराबाद आदि ये कोर्स करवाते हैं जिनमे प्रवेश लेने के लिए प्रवेश परीक्षा देनी होती है।

यह कोर्स करने के पश्चात फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में नौकरी के अनेक विकल्प मौजूद होते हैं। इस इंडस्ट्री में फ्रेशर तथा अनुभवी दोनों तरह के कैंडिडेट्स की काफी मांग होती है। इन कोर्सेज में डिग्री धारी छात्र रिसर्च एंड डेवलपमेंट, लेबोरेटरी, ड्रग डिजाइन, ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट आदि क्षेत्र में जॉब हासिल कर सकते हैं।

फार्मास्युटिकल इंजीनियरिंग में अपना करियर शुरू करने वाले पेशेवर को औसतन पच्चीस हजार रुपए प्रति माह का पैकेज मिलने की संभावना होती है जो कि संस्थान और योग्यता के आधार पर भिन्न हो सकता है।

फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजिस्ट के लिए बढ़ते अवसर Growing opportunities for technologist in the pharmaceutical industry

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