क्या आप बुद्धिमान होने का दिखावा करते हैं?

क्या आप बुद्धिमान होने का दिखावा करते हैं? - कहते हैं कि जब तक दुनिया में बेवकूफ लोग मौजूद हैं तब तक समझदार लोग कभी भी भूखे नहीं मर सकते हैं।


इस बात का तात्पर्य यह है कि मूर्ख लोगों के बीच समझदारों का काम बहुत आसान हो जाता है। अब यह कैसे तय होगा कि दुनिया में कौन मूर्ख है और कौन समझदार है?


मूर्खों के कोई सींग तो होते नहीं है कि उन्हें झट से पहचान लिया जाए। वैसे भी आज के युग में जो चतुर और धूर्त नहीं है उसे अघोषित रूप से मूर्खों की श्रेणी में डाल दिया जाता है।


वैसे भी समझदार की सबसे बड़ी पहचान एक ही रह गई है कि जो भी व्यक्ति सफल है वह समझदार है। कोई व्यक्ति कैसे सफल है उससे किसी को कोई लेना देना नहीं होता है।


कुछ लोग वास्तव में समझदार होते हैं परन्तु अधिकतर लोग सिर्फ समझदार होने का ढोंग ही करते हैं। अतः हम कह सकते हैं कि समझदार लोग दो तरह के होते हैं एक तो वे जो समझदार जैसे दिखते हैं तथा दूसरे वे जो वास्तव में समझदार होते हैं।


यहाँ हम यही प्रमुख बात समझने की कोशिश करेंगे कि इन समझदार दिखने वाले तथा वास्तव में समझदार लोगों के बीच मूल रूप से क्या अंतर होता है?


वास्तविक रूप से समझदार लोग कभी भी लकीर के फकीर नहीं होते हैं। ये लोग अपने रास्ते खुद बनाते हैं न कि किसी के दिखाए हुए रास्तों को ही अपनी नियति समझ लेते हैं। इन लोगों में नए-नए कार्य करने का जज्बा तथा जोखिम लेने की हिम्मत होती है।


जब तक जोखिम नहीं लिया जाता है तब तक कोई भी नई शुरुआत नहीं हो सकती है। समझदारी के साथ लिया गया जोखिम प्रगति के नए-नए रास्ते खोलता है। बिना जोखिम लिए सफलता तथा नव अनुसन्धान करना असंभव है।


समझदार दिखने वाले लोग न तो कभी खुद कोई जोखिम लेते हैं तथा न ही कभी किसी और को जोखिम लेने के लिए प्रेरित करते हैं। ये लोग सिर्फ और सिर्फ परंपरागत रास्तों पर चलना ही जानते है तथा नए रास्तों पर चलना पसंद नहीं करते हैं।


ऐसे लोग सफल होने के पश्चात के परिणाम को न सोचकर असफल होने के पश्चात की परिस्थितियों का आकलन भर करते रहते हैं।


समझदार लोग परिश्रमी होते हैं परन्तु वे अपने परिश्रम को एक दिशा के साथ करना पसंद करते हैं अर्थात ये लोग दिशाहीन कठोर परिश्रम में विश्वास नहीं करते हैं। इनका कठोर परिश्रम ‘स्मार्ट वर्क’ केन्द्रित होता है। अतः ये लोग केवल हार्ड वर्क को तवज्जो न देकर ‘स्मार्ट वर्क’ को अधिक तवज्जो देते हैं।


समझदार दिखने वाले लोग परंपरागत तरीके से सिर्फ और सिर्फ कठोर परिश्रम को ही सफलता का आधार मानते हैं। यह एक कटु सत्य है कि अगर केवल कठोर परिश्रम से ही व्यक्ति सफल होता तो मजदूर सबसे अधिक सफल होते क्योंकि साधारण मनुष्य के लिए उन जितनी मेहनत कर पाना संभव नहीं है।


वास्तविक रूप में समझदार लोग हमेशा कुछ न कुछ नया करने तथा नया सीखने की कोशिश करते हैं भले ही वह चीज उनसे सीधे-सीधे न जुड़ी हो। सीखने की कोई उम्र नहीं होती है तथा सफलता भी किसी उम्र की मोहताज नहीं होती है।


मनुष्य के मन में जब तक कुछ न कुछ नया सीखने की इच्छा और उमंग रहती है तब तक ही वह मनुष्य कहा जा सकता है अन्यथा तो वह भी जानवर ही है क्योंकि जानवर में कुछ भी सीखने की कोई इच्छा नहीं होती है।


समझदार दिखने वाले लोग कुछ भी नया करने तथा सीखने की जरुरत नहीं समझते हैं। इनके हिसाब से नया न करके जो कुछ चलता आ रहा है सिर्फ वही करना चाहिए। कुल मिलाकर ये लोग अपने कम्फर्ट जोन से बाहर ही नहीं निकलना चाहते हैं।


वास्तविक रूप से समझदार लोग खुश रहने के लिए बहाने नहीं ढूँढते हैं बल्कि वे अपने काम में ही खुशी तलाश लेते हैं। ऐसे लोग काम ही ऐसा करते हैं जो उनका मन पसंद हो तथा जिसमे उनको मजा आता हो।


अतः ये लोग काम में ही खुशी तथा खुशी में ही काम ढूँढकर हमेशा प्रसन्न रहते हैं। समझदार दिखने वाले लोग अपने काम के लिए खुशियों समेत अपना सब कुछ दाव पर लगा देते हैं।


ऐसे लोग एक वक्त में सिर्फ एक ही कार्य कर सकते हैं अर्थात ये लोग जब काम करते हैं तो खुश नहीं रह पाते हैं और जब खुश रहते हैं तब कार्य नहीं कर पाते हैं। कुल मिलाकर ये लोग जीने के लिए अपनी सभी खुशियाँ कुर्बान कर देते हैं।


वास्तविक रूप से समझदार लोग काम भी करते हैं, मेहनत भी करते हैं तथा इनके साथ ही साथ अपनी जिन्दगी को भी अपने तरीके से जीते हैं। ये लोग कल पर भरोसा नहीं करते हैं कि आज काम कर लें तथा कल आराम करेंगे बल्कि ये लोग सभी कार्य साथ-साथ करते हैं।


भगवान ने इंसान को सिर्फ एक ही जीवन दिया है उसे कैसा गुजारना है ये स्वयं इंसान पर निर्भर करता है। समझदार दिखने वाले लोग अक्सर बहुत ज्यादा व्यस्त रहते हैं तथा इनके पास हमेशा वक्त की कमी रहती है। इन लोगों की नजर में हमेशा काम में डूबा रहना ही जिन्दगी बन जाती है।


वास्तविक रूप से समझदार लोग हँसते खेलते रहते हैं। ये लोग दूसरों के साथ-साथ खुद पर भी हँसते हैं अर्थात खुद की कमियों पर हँसकर उन्हें सुधारने की चेष्ठा भी करते हैं।


ऐसे लोग अपने नकारात्मक पहलुओं पर भी गौर करते हैं तथा किसी और द्वारा अपने नकारात्मक पहलू बताये जाने पर कभी नाराज नहीं होते हैं।


वैसे भी कहा जाता है निंदक पास में रखने से इंसान की प्रगति होती है। समझदार दिखने वाले लोग हमेशा गंभीर होते हैं तथा ये अपना स्वभाव ही ऐसा बना लेते हैं कि कोई भी इनसे अनौपचारिक बातें करते हुए भी कतराता है।


अब ये हम पर निर्भर करता है कि हम वास्तव में समझदार बनना चाहते हैं या फिर केवल समझदार दिखना ही चाहते हैं। सफलता प्राप्त करने के लिए वास्तविक रूप में समझदार बनना ही आवश्यक है।


क्या आप बुद्धिमान होने का दिखावा करते हैं? Do you pretend to intelligent?

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